lesson 3

Chapter 3 - धातु और अधातु

📘 Chapter 3 – धातु (Metals) और अधातु (Non-Metals)

🔹 3.1 धातुओं के भौतिक गुणधर्म (Physical Properties of Metals)

1️⃣ धात्विक चमक (Metallic Lustre) ✨

शुद्ध रूप में धातुओं की सतह चमकदार (shiny) होती है। इसी गुण को कहते हैं धात्विक चमक।

Examples: सोना (Gold), चाँदी (Silver), कॉपर (Copper)

👉 सोना-चाँदी का उपयोग गहने बनाने में होता है।

2️⃣ कठोरता (Hardness) 🔨

अधिकांश धातुएँ कठोर होती हैं, लेकिन कठोरता अलग-अलग होती है।

  • Iron (Fe) – काफ़ी कठोर
  • Sodium (Na), Potassium (K) – इतने मुलायम कि चाकू से काटे जा सकते हैं

3️⃣ आघातवर्ध्यता (Malleability) 🪙

धातुओं को पीटकर पतली चादर में बदला जा सकता है।

सोना और चाँदी सबसे ज़्यादा आघातवर्ध्य धातुएँ हैं।

👉 सोने की पत्तियाँ (Gold foils) प्रयोगशाला और गहनों में उपयोग होती हैं।

4️⃣ तन्यता (Ductility) 🧵

धातुओं को खींचकर पतले तार बनाए जा सकते हैं।

सोना (Gold) सबसे तन्य धातु है → 1g सोने से 2 km लंबा तार।

👉 Copper (Cu) और Aluminium (Al) बिजली के तार बनाने में उपयोग।

5️⃣ ऊष्मा चालकता (Heat Conduction) 🔥

Metals heat के अच्छे conductor होते हैं।

  • Best: Silver (Ag), Copper (Cu)
  • Poor: Lead (Pb), Mercury (Hg)

👉 खाना पकाने के बर्तन Aluminium और Copper के।

6️⃣ विद्युत चालकता (Electric Conduction) ⚡

Metals electricity के अच्छे conductor होते हैं।

Examples: Copper wires, Aluminium wires।

👉 Current से बचाने के लिए इन wires पर PVC / Rubber coating होती है।

7️⃣ ध्वनिकता (Sonority) 🔔

Metals को जब किसी सतह से टकराते हैं तो घनघनाहट जैसी ध्वनि पैदा होती है।

👉 इसी कारण स्कूल की घंटी, मंदिर की घंटी धातु की बनी होती है।

✨ Quick Revision (Golden Points for Exam)

  • Metallic lustre → Metals shine (Gold, Silver)
  • Hardness → Most hard, Na & K soft
  • Malleability → Metals beaten into sheets
  • Ductility → Wires (Cu, Al)
  • Heat conductor → Best Ag, Cu
  • Electricity conductor → Metals, insulated with PVC
  • Sonority → Sound on hitting (bell)
3.1.2 अधातु

3.1.2 अधातु

🔹 अधातु की परिभाषा:
वे तत्व जिन्हें हम धातु के विपरीत गुणों के कारण अलग पहचानते हैं, उन्हें अधातु कहते हैं।
👉 अधातुओं की संख्या धातुओं से कम होती है।

🔹 अधातुओं के उदाहरण:
कार्बन (C)
सल्फर (S)
आयोडीन (I)
ऑक्सीजन (O₂)
हाइड्रोजन (H₂)
ब्रोमीन (Br₂) → यह अकेली अधातु है जो द्रव (Liquid) अवस्था में पाई जाती है।
बाकी अधातु या तो ठोस (Solid) या गैस (Gas) अवस्था में मिलती हैं।

⚖️ धातु व अधातु की तुलना (भौतिक गुणों के आधार पर)

गुणधर्म धातु अधातु
सामान्य अवस्था ज़्यादातर ठोस (Mercury को छोड़कर) ज़्यादातर गैसें या ठोस (Br₂ को छोड़कर)
गलनांक (Melting Point) अधिक (Gallium और Cesium को छोड़कर) कम या बहुत अधिक (जैसे कार्बन का हीरा रूप)
चमक (Lustre) अधिक नहीं (लेकिन आयोडीन अधातु होते हुए भी चमकीला है)
कठोरता सामान्यतः कठोर (Sodium, Potassium को छोड़कर) कठोर नहीं (लेकिन हीरा = सबसे कठोर पदार्थ)
चालकता (Conductivity) बिजली और ऊष्मा का अच्छा चालक बुरा चालक (लेकिन ग्रेफाइट बिजली का अच्छा चालक है)

✨ अधातुओं में खास अपवाद (Important Exceptions)
Gallium और Cesium (धातु होते हुए भी)
👉 हाथ पर रखने से पिघल जाते हैं (बहुत कम गलनांक)।
आयोडीन (Iodine)
👉 अधातु है, लेकिन चमकदार (lustrous) दिखता है।
कार्बन (C) – अलग-अलग रूपों (Allotropes) में पाया जाता है:
हीरा (Diamond) → सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ, बहुत अधिक गलनांक और क्वथनांक।
ग्रेफाइट (Graphite) → बिजली का अच्छा चालक।
सोडियम (Na), पोटैशियम (K), लिथियम (Li)
👉 इतनी मुलायम कि चाकू से काट सकते हैं।
👉 कम घनत्व और कम गलनांक वाली धातुएँ।

⚗️ रासायनिक गुणों के आधार पर वर्गीकरण
सिर्फ भौतिक गुणों से धातु और अधातु को पूरी तरह अलग नहीं कर सकते (क्योंकि कई अपवाद हैं)।
👉 असली फर्क रासायनिक गुणों से पता चलता है:
अधिकांश अधातु → ऑक्साइड बनाते हैं, जो पानी में घुलकर अम्ल (Acid) बनाते हैं।
अधिकांश धातु → ऑक्साइड बनाते हैं, जो पानी में घुलकर क्षार (Base) बनाते हैं।

✅ इसे याद रखने का आसान ट्रिक:
"धातु = बेस बनाती हैं" (धातु = दही वाली बेस जैसी → क्षार)।
"अधातु = एसिड बनाती हैं" (अधातु = खट्टे नींबू जैसी → अम्ल)।

3.2 धातुओं के रासायनिक गुणधर्म

हम धातुओं के रासायनिक गुणों को 3.2.1 से 3.2.4 तक पढ़ेंगे।

3.2.1 धातुओं का वायु (ऑक्सीजन) में दहन

👉 लगभग सभी धातुएँ ऑक्सीजन के साथ मिलकर धातु ऑक्साइड बनाती हैं।

सामान्य अभिक्रिया:
धातु + ऑक्सीजन → धातुऑक्साइड

🔹 उदाहरण

  • मैग्नीशियम (Mg) – वायु में जलाने पर चमकदार सफेद लौ के साथ जलता है। उत्पाद: MgO (मैग्नीशियम ऑक्साइड) → श्वेत पाउडर जैसा पदार्थ।
  • कॉपर (Cu) – गर्म करने पर ऑक्सीजन से अभिक्रिया करता है। बनता है: काले रंग का कॉपर (II) ऑक्साइड 2Cu + O₂ → 2CuO
  • एल्युमिनियम (Al) – 4Al + 3O₂ → 2Al₂O₃ उत्पाद: एल्युमिनियम ऑक्साइड (Al₂O₃)

🔹 धातु ऑक्साइड की प्रकृति

अधिकांश धातु ऑक्साइड क्षारकीय (Basic) होते हैं।

कुछ धातु ऑक्साइड उभयधर्मी (Amphoteric) होते हैं → यानी ये अम्ल और क्षार दोनों से अभिक्रिया करते हैं।

उदाहरण: Al₂O₃, ZnO

Al₂O₃ + 6HCl → 2AlCl₃ + 3H₂O
Al₂O₃ + 2NaOH → 2NaAlO₂ + H₂O

🔹 पानी में घुलने वाले धातु ऑक्साइड

कुछ धातु ऑक्साइड पानी में घुलकर क्षार (Base) बनाते हैं।

Na₂O + H₂O → 2NaOH
K₂O + H₂O → 2KOH

🔹 धातुओं की ऑक्सीजन से अभिक्रियाशीलता (Reactivity)

  • सोडियम और पोटैशियम → बहुत तेज़ी से ऑक्सीजन से अभिक्रिया करते हैं, हवा में जल भी सकते हैं। 👉 इन्हें सुरक्षित रखने के लिए किरोसिन तेल में डुबाकर रखते हैं।
  • मैग्नीशियम, एल्युमिनियम, जिंक, लेड → सामान्य तापमान पर जल्दी ऑक्सीजन से अभिक्रिया नहीं करते, पर सतह पर ऑक्साइड परत बना लेते हैं।
  • आयरन (Fe) → धीरे-धीरे ऑक्सीकरण करता है (जंग लगना)।
  • कॉपर (Cu) → आसानी से दहन नहीं करता, लेकिन गरम करने पर उस पर काले रंग की CuO की परत चढ़ जाती है।
  • सिल्वर (Ag) और गोल्ड (Au) → noble धातुएँ हैं, ये ऊँचे तापमान पर भी ऑक्सीजन से अभिक्रिया नहीं करतीं।

🔹 अभिक्रियाशीलता का क्रम (Reactivity Order)

सोडियम > मैग्नीशियम > जिंक > आयरन > कॉपर > लेड > सिल्वर/गोल्ड

📌 सारांश (Exam के लिए शॉर्टकट)

  • धातु + O₂ → धातु ऑक्साइड (ज़्यादातर क्षारकीय)
  • कुछ ऑक्साइड = उभयधर्मी (Al₂O₃, ZnO)
  • Na₂O, K₂O पानी में घुलकर NaOH, KOH बनाते हैं।
  • सबसे तेज़ अभिक्रिया = Na, K (इसलिए kerosene में रखते हैं)।
  • सबसे कम अभिक्रिया = Ag, Au (noble metals)।

धातुएँ और जल की अभिक्रिया (Class 10 Science – Ch-3)

🟢 सामान्य नियम:

  • जब धातुएँ (Metals) जल (Water) के साथ अभिक्रिया करती हैं, तो सामान्यतः:
  • हाइड्रोजन गैस (H₂) उत्पन्न होती है।
  • धातु ऑक्साइड (Metal Oxide) या धातु हाइड्रॉक्साइड (Metal Hydroxide) बनते हैं।

👉 समीकरण:
धातु + जल → धातु ऑक्साइड + H₂ ↑
धातु ऑक्साइड + जल → धातु हाइड्रॉक्साइड

लेकिन ध्यान रहे: सभी धातुएँ जल के साथ अभिक्रिया नहीं करतीं।

🔥 1. अत्यधिक सक्रिय धातुएँ (Potassium और Sodium)

ये बहुत तेज़ी से ठंडे जल के साथ अभिक्रिया करती हैं। अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी (Exothermic) होती है।

निकली हुई हाइड्रोजन गैस तुरंत जल उठती है और प्रज्वलित हो जाती है।

👉 समीकरण:
2K(s) + 2H₂O(l) → 2KOH(aq) + H₂(g) + ऊष्मा
2Na(s) + 2H₂O(l) → 2NaOH(aq) + H₂(g) + ऊष्मा

बने उत्पाद:
KOH / NaOH (क्षारीय विलयन)
हाइड्रोजन गैस

⚡ खासियत: Sodium/Potassium को जल में डालते ही चमकदार लौ दिखाई देती है।

🟡 2. मध्यम सक्रिय धातुएँ (Calcium)

Calcium की जल के साथ अभिक्रिया धीमी होती है। निकली हुई ऊष्मा हाइड्रोजन को प्रज्वलित करने के लिए पर्याप्त नहीं होती।

Hydrogen के बुलबुले सतह पर चिपक जाते हैं → Calcium पानी पर तैरने लगता है।

👉 समीकरण:
Ca(s) + 2H₂O(l) → Ca(OH)₂(aq) + H₂(g)

⚡ खासियत:
Ca(OH)₂ = स्लैक्ड लाइम (चूना पानी) → थोड़ा घुलनशील।
विलयन हल्का क्षारीय हो जाता है।

🟠 3. कम सक्रिय धातुएँ (Magnesium)

शीतल जल → कोई अभिक्रिया नहीं।
गर्म जल → धीरे-धीरे अभिक्रिया होती है।

उत्पाद: Mg(OH)₂ और H₂ गैस।

👉 समीकरण:
Mg(s) + 2H₂O(l) (गरम) → Mg(OH)₂(aq) + H₂(g)

⚡ खासियत: Hydrogen के बुलबुले सतह पर चिपक जाते हैं → यह भी पानी पर तैरने लगता है।

🔵 4. कम प्रतिक्रियाशील धातुएँ (Aluminium, Iron, Zinc)

ये शीतल/गर्म जल के साथ अभिक्रिया नहीं करतीं।
लेकिन भाप (Steam) के साथ अभिक्रिया करती हैं → धातु ऑक्साइड + हाइड्रोजन।

👉 समीकरण:
2Al(s) + 3H₂O(g) → Al₂O₃(s) + 3H₂(g)
3Fe(s) + 4H₂O(g) → Fe₃O₄(s) + 4H₂(g)
Zn(s) + H₂O(g) → ZnO(s) + H₂(g)

⚡ खासियत:
Al की सतह पर Al₂O₃ की परत बन जाती है।
Fe + Steam → Fe₃O₄ (Magnetite)।

⚪ 5. बहुत कम सक्रिय धातुएँ (Pb, Cu, Ag, Au)

Lead (Pb), Copper (Cu), Silver (Ag), Gold (Au) → ये जल या भाप दोनों से अभिक्रिया नहीं करतीं।

इसलिए इन्हें कम प्रतिक्रियाशील धातुएँ कहा जाता है।

📊 सारणी – धातुओं की जल के साथ अभिक्रिया

धातु जल के साथ अभिक्रिया उत्पाद
K, Na ठंडे जल के साथ बहुत तेज KOH/NaOH + H₂
Ca ठंडे जल के साथ धीमी Ca(OH)₂ + H₂
Mg ठंडे जल के साथ नहीं, गर्म जल के साथ धीमी Mg(OH)₂ + H₂
Al, Zn, Fe केवल भाप के साथ अभिक्रिया ऑक्साइड + H₂
Pb, Cu, Ag, Au कोई अभिक्रिया नहीं

👉 एग्ज़ाम टिप्स:

  • "Sodium और Calcium की जल के साथ अभिक्रिया में क्या अंतर है?"
  • "Iron जल के साथ क्यों नहीं, पर भाप के साथ अभिक्रिया करता है?"
  • "Hydrogen गैस की प्रज्वलन क्यों होती है Sodium/Potassium में?"

📘 3.2.3 धातुओं और अम्लों की अभिक्रिया

🤔 1. सबसे पहले समझो —
धातु और अम्ल आपस में मिलते हैं तो क्या होता है❓
👉 धातु + अम्ल → लवण (Salt) + हाइड्रोजन गैस (H₂)
मतलब — जब कोई धातु अम्ल में डाली जाती है, तो गैस के बुलबुले निकलने लगते हैं (वही हाइड्रोजन है) और साथ में लवण (नमक जैसा यौगिक) बनता है।
2. उदाहरण:
मैग्नीशियम (Mg) + Hydrochloric Acid (HCl)
𝑀𝑔 + 2𝐻𝐶𝑙 → 𝑀𝑔𝐶𝑙2 + 𝐻2 ↑
(यहाँ मैग्नीशियम क्लोराइड बन गया और हाइड्रोजन गैस निकली।)

जिंक (Zn) + HCl
𝑍𝑛 + 2𝐻𝐶𝑙 → 𝑍𝑛𝐶𝑙2 + 𝐻2 ↑

आयरन (Fe) + HCl
𝐹𝑒 + 2𝐻𝐶𝑙 → 𝐹𝑒𝐶𝑙2 + 𝐻2 ↑
🧪 3. पर सवाल ये है—
क्या सभी धातुएँ ऐसे ही अम्लों से रिएक्ट करती हैं❓
👉 नहीं।
कॉपर (Cu) जैसी धातु Hydrochloric acid (HCl) के साथ कोई प्रतिक्रिया नहीं करती।
मतलब कॉपर डाल दो तो न बुलबुले आएंगे, न गर्मी निकलेगी।
💥 4. अब खास बात — Nitric Acid (HNO₃)
👉 जब धातुएँ HNO₃ से मिलती हैं, तो हाइड्रोजन गैस नहीं निकलती।
क्यों❓
क्योंकि HNO₃ बहुत तेज़ ऑक्सीकारक (strong oxidizing agent) है।
यह बनने वाली हाइड्रोजन गैस को तुरंत पानी (H₂O) में बदल देता है।
और खुद नाइट्रोजन के ऑक्साइड्स (N₂O, NO, NO₂) में बदल जाता है।
लेकिन❗ मैग्नीशियम (Mg) और मैंगनीज (Mn) जैसे धातु बहुत पतले (dilute) HNO₃ के साथ हाइड्रोजन गैस छोड़ सकते हैं।
🔥 5. अभिक्रियाशीलता का क्रम (Reactivity Order)
क्रियाकलाप में देखा गया कि —
👉 Mg > Al > Zn > Fe
मैग्नीशियम सबसे तेज़ प्रतिक्रिया करता है (सबसे ज्यादा बुलबुले बनते हैं और सबसे ज्यादा गर्मी निकलती है)।
आयरन सबसे कम।
कॉपर तो करता ही नहीं।
📝 6. याद रखने लायक शॉर्ट पॉइंट्स:
धातु + अम्ल = लवण + H₂
HNO₃ → H₂ को गैस बनने ही नहीं देता (oxidize करके H₂O बना देता है)।
Mg और Mn dilute HNO₃ से H₂ गैस निकाल सकते हैं।
अभिक्रियाशीलता क्रम: Mg > Al > Zn > Fe > Cu (Cu कोई प्रतिक्रिया नहीं करता)।
👉 तो भाई, अब इसको ऐसे सोचो —
तुम्हारे पास अलग-अलग धातुएँ हैं और तुम उन्हें HCl की बोतल में डालते हो।
Mg डालोगे = "सबसे तेज बुलबुले"
Al या Zn डालोगे = "मध्यम बुलबुले"
Fe डालोगे = "कम बुलबुले"
Cu डालोगे = "कुछ भी नहीं होगा"

📘 3.2.4 – 3.2.5 धातुएँ और अधातुएँ

🔹 3.2.4 धातुएँ अन्य धातु लवणों के विलयन के साथ कैसे अभिक्रिया करती हैं?
👉 सिंपल बात:
एक ज़्यादा ताकतवर (ज़्यादा अभिक्रियाशील) धातु, कमज़ोर (कम अभिक्रियाशील) धातु को उसके लवण से बाहर फेंक देती है।
इसे विस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
अगर धातु A धातु B को उसके लवण से हटा देती है, तो धातु A > B (यानी A ज्यादा अभिक्रियाशील है)।
📌 General Reaction:
धातु (A) + (B) का लवण विलयन → (A) का लवण विलयन + धातु (B)
💡 आसान उदाहरण:
लौह (Fe) + कॉपर सल्फेट (CuSO₄) → Fe ज्यादा एक्टिव है, Cu को बाहर निकाल देगा।
Reaction → Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu
मतलब: लौह (Iron) ताँबे (Copper) से ज्यादा अभिक्रियाशील है।

कॉपर (Cu) + FeSO₄ → कॉपर कमज़ोर है, वो Iron को बाहर नहीं निकाल पाएगा।
Reaction → कोई प्रतिक्रिया नहीं होगी।
📌 इसलिए Iron > Copper in reactivity.
🔹 3.2.5 सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series)
👉 ये एक लिस्ट/तालिका है जिसमें धातुओं को उनकी ताकत (अभिक्रियाशीलता) के आधार पर रखा गया है।
ऊपर वाली धातुएँ = सबसे ज्यादा एक्टिव
नीचे वाली धातुएँ = सबसे कम एक्टिव
सक्रियता श्रेणी (Descending order):
K (पोटैशियम) – 🔥 सबसे ज्यादा अभिक्रियाशील
Na (सोडियम)
Ca (कैल्सियम)
Mg (मैग्नीशियम)
Al (एल्युमिनियम)
Zn (जिंक)
Fe (आयरन)
Pb (लेड)
H (हाइड्रोजन) – 🔑 Reference point
Cu (कॉपर)
Hg (पारद)
Ag (सिल्वर)
Au (गोल्ड) – 👑 सबसे कम अभिक्रियाशील
🧠 याद रखने की ट्रिक (Mnemonics):
👉 "काका नै कैरम मैच अलगे ज़ोर फ़ोकस पे, हस कर हिम्मत करो, अच्छा-अच्छा गाओ"
K – काका (पोटैशियम)
Na – नै (सोडियम)
Ca – कैरम (कैल्सियम)
Mg – मैच (मैग्नीशियम)
Al – अलगे (एल्युमिनियम)
Zn – ज़ोर (जिंक)
Fe – फ़ोकस (आयरन)
Pb – पे (लेड)
H – हस (हाइड्रोजन)
Cu – कर (कॉपर)
Hg – हिम्मत (पारद)
Ag – अच्छा (सिल्वर)
Au – गाओ (गोल्ड)
📌 Exam Point of View:
विस्थापन अभिक्रिया = कौन किसको हटा सकता है?
ज़्यादा एक्टिव धातु कम एक्टिव को उसके लवण से निकाल देती है।
सक्रियता श्रेणी से ही तय होगा कौन ज्यादा अभिक्रियाशील है।
हाइड्रोजन को भी शामिल किया गया है ताकि comparison हो सके।
📘 Chemistry

✨ धातुएँ एवं अधातुएँ कैसे अभिक्रिया करती हैं?

1️⃣ आधार समझो

हर परमाणु के चारों तरफ इलेक्ट्रॉन कोश (shells) होते हैं।

किसी भी तत्व की अभिक्रियाशीलता (reactivity) इस पर निर्भर करती है कि उसके बाहरी कोश (valence shell) में कितने इलेक्ट्रॉन हैं।

उत्कृष्ट गैसें (Noble gases) जैसे हीलियम, नीयॉन, आर्गन – इनके बाहरी कोश पूरे (अष्टक/duplet) होते हैं, इसलिए ये लगभग अक्रियाशील (unreactive) होती हैं।

बाक़ी धातु और अधातु हमेशा कोशिश करते हैं कि उनका भी बाहरी कोश भर जाए → इसी कारण वे प्रतिक्रिया करते हैं।

2️⃣ सोडियम का उदाहरण (धातु)

सोडियम (Na) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: 2, 8, 1

यानी बाहरी कोश (M-shell) में सिर्फ़ 1 इलेक्ट्रॉन है।

स्थिर होने के लिए सोडियम इस 1 इलेक्ट्रॉन को त्याग देता है।

अब उसके पास नया बाहरी कोश (L-shell) बन जाता है, जिसमें 8 इलेक्ट्रॉन हैं → अष्टक पूरा।

इलेक्ट्रॉन खोने पर सोडियम में प्रोटॉन 11 और इलेक्ट्रॉन 10 रह जाते हैं।

→ मतलब सोडियम पर +1 चार्ज आ जाता है।

→ इस आयन को कहते हैं: Na⁺ (सोडियम धनायन)

3️⃣ क्लोरीन का उदाहरण (अधातु)

क्लोरीन (Cl) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: 2, 8, 7

बाहरी कोश (M-shell) में 7 इलेक्ट्रॉन हैं।

अष्टक पूरा करने के लिए क्लोरीन को 1 इलेक्ट्रॉन चाहिए।

जब क्लोरीन यह 1 इलेक्ट्रॉन सोडियम से ले लेता है → उसके बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन हो जाते हैं।

अब क्लोरीन के पास प्रोटॉन 17 और इलेक्ट्रॉन 18 हो जाते हैं।

→ यानी उस पर –1 चार्ज आ जाता है।

→ इस आयन को कहते हैं: Cl⁻ (क्लोराइड ऋणायन)

4️⃣ सोडियम और क्लोरीन की अभिक्रिया

सोडियम → इलेक्ट्रॉन छोड़ता है।

क्लोरीन → वही इलेक्ट्रॉन ले लेता है।

दोनों आयनों (Na⁺ और Cl⁻) के बीच इलेक्ट्रोस्टैटिक आकर्षण (electrostatic force) बनता है।

यह आकर्षण एक नए यौगिक को जन्म देता है: NaCl (सोडियम क्लोराइड / सामान्य नमक)

👉 यही प्रक्रिया कहलाती है: आयनिक बंध (Ionic Bond)

5️⃣ याद रखने योग्य बातें (Exam के लिए)
  • धातु (जैसे Na, Mg, Ca) → इलेक्ट्रॉन खोकर धनायन बनाती हैं।
  • अधातु (जैसे Cl, O, S) → इलेक्ट्रॉन पाकर ऋणायन बनाती हैं।
  • आयनों के बीच आकर्षण = आयनिक बंध
  • आयनिक यौगिक (जैसे NaCl) ठोस अवस्था में क्रिस्टलीय (crystalline) होते हैं।
  • उच्च गलनांक और क्वथनांक (melting & boiling point) रखते हैं।
  • जल में घुलकर विद्युत का संचालन करते हैं।
📘 Chemistry

तत्वों के प्रकार और उनकी इलेक्ट्रॉनिक संरचना

1️⃣ उत्कृष्ट गैसें (Noble Gases)

हीलियम (He), निऑन (Ne), आर्गन (Ar)

इनकी विशेषता यह है कि इनके बाहरी कोश (valence shell) में इलेक्ट्रॉन पूर्ण होते हैं।

हीलियम (He) → इलेक्ट्रॉनों की संख्या: 2 (K कोश पूरा)

निऑन (Ne) → इलेक्ट्रॉनों की संख्या: 10 (K=2, L=8)

आर्गन (Ar) → इलेक्ट्रॉनों की संख्या: 18 (K=2, L=8, M=8)

यही कारण है कि ये तत्व अक्रिय (Inert) होते हैं और अन्य तत्वों के साथ अभिक्रिया नहीं करते।

2️⃣ धातुएँ (Metals)

उदाहरण – सोडियम (Na), मैग्नीशियम (Mg), एल्युमिनियम (Al), पोटैशियम (K), कैल्शियम (Ca)

इन धातुओं की खासियत यह है कि ये हमेशा इलेक्ट्रॉन खोकर (electron loss) धनायन (+ve ion) बनाते हैं।

सोडियम (Na) → परमाणु संख्या 11 → इलेक्ट्रॉन वितरण: 2,8,1 → 1 इलेक्ट्रॉन खोकर Na⁺ बनाता है।

मैग्नीशियम (Mg) → 2,8,2 → 2 इलेक्ट्रॉन खोकर Mg²⁺ बनाता है।

एल्युमिनियम (Al) → 2,8,3 → 3 इलेक्ट्रॉन खोकर Al³⁺ बनाता है।

पोटैशियम (K) → 2,8,8,1 → 1 इलेक्ट्रॉन खोकर K⁺ बनाता है।

कैल्शियम (Ca) → 2,8,8,2 → 2 इलेक्ट्रॉन खोकर Ca²⁺ बनाता है।

👉 निष्कर्ष: धातुएँ हमेशा स्थिरता (Noble gas configuration) पाने के लिए इलेक्ट्रॉन खोती हैं।

3️⃣ अधातुएँ (Non-Metals)

उदाहरण – नाइट्रोजन (N), ऑक्सीजन (O), फ्लुओरीन (F), फॉस्फोरस (P), सल्फर (S), क्लोरीन (Cl)

अधातुएँ इलेक्ट्रॉन पकड़ती हैं (gain electrons) और ऋणायन (–ve ion) बनाती हैं।

नाइट्रोजन (N) → 2,5 → 3 इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर N³⁻ बनाता है।

ऑक्सीजन (O) → 2,6 → 2 इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर O²⁻ बनाता है।

फ्लुओरीन (F) → 2,7 → 1 इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर F⁻ बनाता है।

क्लोरीन (Cl) → 2,8,7 → 1 इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर Cl⁻ बनाता है।

👉 अधातुएँ भी स्थिरता (Noble gas configuration) पाने के लिए इलेक्ट्रॉन पकड़ती हैं।

4️⃣ आयनिक बंध (Ionic Bonding)

सोडियम क्लोराइड (NaCl)

सोडियम (Na) → 2,8,1 → 1 इलेक्ट्रॉन खोकर Na⁺ बनाता है।

क्लोरीन (Cl) → 2,8,7 → 1 इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर Cl⁻ बनाता है।

अब Na⁺ और Cl⁻ विपरीत आवेश होने के कारण आकर्षित होते हैं और एक स्थायी आयनिक यौगिक (NaCl) का निर्माण करते हैं।

ध्यान रहे: NaCl अणु (molecule) के रूप में नहीं, बल्कि आयनों के समूह (Ionic lattice) के रूप में पाया जाता है।

5️⃣ सारांश (Summary)
  • धातुएँ इलेक्ट्रॉन खोकर धनायन बनाती हैं।
  • अधातुएँ इलेक्ट्रॉन पाकर ऋणायन बनाती हैं।
  • Na⁺ और Cl⁻ मिलकर NaCl (सोडियम क्लोराइड) का निर्माण करते हैं।
  • यह बंधन आयनिक बंध (Electrovalent bond) कहलाता है।
  • MgCl₂ में उपस्थित आयन:
    • धनायन (Cation): Mg²⁺ → मैग्नीशियम आयन
    • ऋणायन (Anion): Cl⁻ → क्लोराइड आयन
    👉 इसलिए MgCl₂ = 1 Mg²⁺ + 2 Cl⁻ से बना होता है।

🧪 आयनिक यौगिकों के गुणधर्म (Properties of Ionic Compounds)

आयनिक यौगिक वे यौगिक होते हैं जो धनायन (Cation) और ऋणायन (Anion) के बीच बने मजबूत वैद्युत-आकर्षण बल (Electrostatic Force) से जुड़े रहते हैं। इनके कुछ महत्वपूर्ण गुण इस प्रकार हैं –

1️⃣ भौतिक प्रकृति (Physical Nature)

  • आयनिक यौगिक हमेशा ठोस (Solid) अवस्था में पाए जाते हैं।
  • ये सामान्यतः कठोर (Hard) होते हैं, लेकिन साथ ही भंगुर (Brittle) भी होते हैं।
  • अगर इन पर ज़्यादा दबाव डालो तो ये टुकड़ों में टूट जाते हैं, मोड़ते नहीं।
  • 👉 उदाहरण: साधारण नमक (NaCl) – यह भी कठोर और भंगुर ठोस है।

2️⃣ गलनांक एवं क्वथनांक (Melting & Boiling Point)

  • आयनिक यौगिकों का गलनांक और क्वथनांक बहुत उच्च (High) होता है।
  • कारण → आयनों को जोड़कर रखने वाला बल बहुत मजबूत होता है। इसे तोड़ने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा/ऊष्मा चाहिए।
  • 👉 जैसे NaCl का गलनांक लगभग 800°C होता है।

3️⃣ घुलनशीलता (Solubility)

  • आयनिक यौगिक सामान्यतः जल में घुलनशील (Soluble in Water) होते हैं।
  • लेकिन ये किरोसिन, पेट्रोल, तेल जैसे कार्बनिक विलायकों में अविलेय (Insoluble) रहते हैं।
  • 👉 कारण → पानी एक ध्रुवीय विलायक (Polar Solvent) है, जो आयनों को आसानी से खींच लेता है।

4️⃣ विद्युत चालकता (Electrical Conductivity)

  • किसी यौगिक के विद्युत चालक होने के लिए आवेशित कण (Charged Particles) की गति ज़रूरी है।
  • ठोस अवस्था में आयनिक यौगिक बिजली नहीं चलाते → क्योंकि आयन अपनी जगह जमे रहते हैं और हिल-डुल नहीं सकते।
  • पिघली हुई अवस्था या जलीय विलयन में ये बिजली चालक (Good Conductor) होते हैं → क्योंकि आयन अब स्वतंत्र रूप से हिल सकते हैं।
  • 👉 जैसे → NaCl का घोल बिजली प्रवाहित करता है।

✅ याद रखने का तरीका

  • कठोर और भंगुर → Solid Nature
  • गलनांक/क्वथनांक ज्यादा → Strong Force
  • पानी में घुलनशील → Polar Nature
  • बिजली का प्रवाह केवल घोल या पिघली अवस्था में → Free Ions

3.4 धातुओं की प्राप्ति (Occurrence of Metals)

👉 धातुएँ मुख्य रूप से पृथ्वी की भू-पर्पटी (Earth’s crust) और समुद्री जल (Sea water) में पाई जाती हैं।

भू-पर्पटी में धातुओं का स्रोत: धातुएँ प्राकृतिक रूप से खनिजों (Minerals) के रूप में मिलती हैं। अगर किसी खनिज में किसी विशेष धातु की मात्रा इतनी अधिक हो कि उससे धातु निकालना लाभकारी हो, तो उसे अयस्क (Ore) कहते हैं।

समुद्री जल में धातुएँ: इसमें कई विलेय लवण पाए जाते हैं। जैसे— NaCl (सोडियम क्लोराइड), MgCl₂ (मैग्नीशियम क्लोराइड) आदि।

3.4.1 धातुओं का निष्कर्षण (Extraction of Metals)

👉 धातुओं का निष्कर्षण इस बात पर निर्भर करता है कि वह धातु सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) में कहाँ स्थित है।

(A) निम्न अभिक्रियाशील धातुएँ (Low Reactive Metals)

ये धातुएँ बहुत कम अभिक्रियाशील होती हैं। इसलिए ये अक्सर स्वतंत्र अवस्था (Free State) में ही पाई जाती हैं।

उदाहरण : सोना (Au), चाँदी (Ag), प्लैटिनम (Pt), ताँबा (Cu)

कुछ (जैसे Cu और Ag) सल्फ़ाइड (Sulfide ores) और ऑक्साइड (Oxide ores) के रूप में भी मिलते हैं।

(B) मध्यम अभिक्रियाशील धातुएँ (Moderately Reactive Metals)

इनमें जस्ता (Zn), लोहा (Fe), सीसा (Pb) आदि आते हैं।

ये न तो बहुत अभिक्रियाशील होती हैं, न ही बिल्कुल निष्क्रिय। ये प्रायः ऑक्साइड, सल्फ़ाइड और कार्बोनेट अयस्क के रूप में मिलती हैं।

उदाहरण : ZnO (जिंक ऑक्साइड), Fe₂O₃ (हीमेटाइट – Iron ore), PbCO₃ (लीड कार्बोनेट)

(C) उच्च अभिक्रियाशील धातुएँ (Highly Reactive Metals)

इनमें K, Na, Ca, Mg, Al शामिल हैं।

ये इतनी ज्यादा अभिक्रियाशील होती हैं कि कभी भी स्वतंत्र अवस्था में नहीं पाई जातीं।

ये हमेशा अपने यौगिकों (Compounds) के रूप में मिलती हैं, जैसे— NaCl (Common salt), CaCO₃ (Limestone), MgCl₂ (Magnesium chloride), Al₂O₃ (Bauxite – Aluminium ore)

अयस्क से धातु निष्कर्षण की प्रक्रिया (Steps of Extraction)

  • अयस्क का संकेन्द्रण (Concentration of Ore) – मिट्टी, रेत, अशुद्धियाँ (gangue) हटाकर शुद्ध अयस्क प्राप्त करना।
  • अयस्क का रूपांतरण (Conversion of Ore to Oxide) – कई बार अयस्क को ऑक्साइड में बदलना आसान होता है। जैसे : कार्बोनेट → ऑक्साइड (Calcination), सल्फ़ाइड → ऑक्साइड (Roasting)।
  • धातु का निष्कर्षण (Reduction of Oxide to Metal) – ऑक्साइड से शुद्ध धातु प्राप्त करना। तरीका धातु की अभिक्रियाशीलता पर निर्भर करता है।
  • धातु का शोधन (Refining of Metal) – प्राप्त धातु को पूरी तरह शुद्ध बनाना।

📌 सारांश चित्र (Fig. 3.10) यही चार स्टेप्स दिखाता है।

3.4.2 अयस्कों का समृद्धीकरण

पृथ्वी से निकले अयस्क (ores) में केवल धातु नहीं होती, बल्कि उनमें रेत, मिट्टी, पत्थर, अनावश्यक खनिज जैसी अशुद्धियाँ भी होती हैं।

👉 इन अशुद्धियों को गैंग (gangue) कहते हैं।

👉 धातु निकालने से पहले इन गैंग को हटाना जरूरी है।

👉 इसके लिए अयस्क और गैंग के भौतिक या रासायनिक गुणों पर आधारित अलग-अलग तकनीकें अपनाई जाती हैं।

धातु निष्कर्षण की मुख्य प्रक्रिया (Steps of Metallurgy)

अयस्क से शुद्ध धातु पाने के लिए निम्न चरणों का पालन किया जाता है (चित्र 3.10 इसी को दिखाता है) :

अयस्क का सांद्रण (Concentration of Ore)

इसमें गैंग (अशुद्धियाँ) हटाई जाती हैं।

तकनीकें:

  • गुरुत्वाकर्षण विधि (Hydraulic washing)
  • चुंबकीय पृथक्करण (Magnetic separation)
  • फ्रोथ फ्लोटेशन (Froth flotation – सल्फाइड अयस्कों के लिए)
  • रासायनिक विधि (Leaching)

अयस्क का अपचयन (Reduction of Ore to Metal)

अब धातु यौगिक को धातु में बदला जाता है। धातु की क्रियाशीलता पर यह तरीका निर्भर करता है:

  • उच्च क्रियाशील धातुएँ (K, Na, Ca, Mg, Al): इनके अयस्कों का अपघटन विद्युत द्वारा (Electrolysis of molten salts) किया जाता है।
  • मध्यम क्रियाशील धातुएँ (Zn, Fe, Pb, Cu): इनके अयस्कों को पहले भर्जन (Roasting) या निस्तापन (Calcination) द्वारा ऑक्साइड में बदला जाता है। फिर धातु ऑक्साइड का अपचयन कोक (C) या CO से किया जाता है।
  • निम्न क्रियाशील धातुएँ (Ag, Au, Pt, Cu): ये धातुएँ अक्सर शुद्ध रूप में मिल जाती हैं। अगर यौगिक रूप में हों तो हल्के अपचायक से निकाली जा सकती हैं।

धातु का परिष्करण (Refining of Metal)

प्राप्त धातु अक्सर शुद्ध नहीं होती। इसलिए इलेक्ट्रोलाइटिक परिष्करण (Electrolytic refining) या अन्य तरीकों से शुद्ध धातु बनाई जाती है।

👉 इस तरह, अयस्क से शुद्ध धातु मिलने तक पूरा क्रम होता है:

अयस्क → सांद्रण → ऑक्साइड → धातु → शोधन → शुद्ध धातु

3.4.3 सक्रियता श्रेणी में नीचे आने वाली धातुओं का निष्कर्षण

👉 सक्रियता श्रेणी में नीचे वाली धातुएँ (जैसे: Hg, Cu, Ag, Au) बहुत कम अभिक्रियाशील (unreactive) होती हैं।

👉 इसलिए इनका निष्कर्षण (extraction) बहुत आसान होता है।

👉 इन धातुओं को केवल गर्म करने से ही उनके अयस्क से शुद्ध धातु प्राप्त हो जाती है।

1. सिनाबार (HgS) से पारा (Mercury) का निष्कर्षण

सिनाबार = HgS (पारे का मुख्य अयस्क)

जब इसे वायु में गर्म किया जाता है तो यह पहले Mercuric Oxide (HgO) में बदल जाता है।

HgO को और अधिक गर्म करने पर यह Mercury (Hg) में अपचयित (reduce) हो जाता है।

प्रतिक्रिया :
HgS (s) + O₂ (g) → HgO (s) + SO₂ (g)
2HgO (s) → 2Hg (l) + O₂ (g)

👉 इस प्रकार, पारा (Mercury) को सिर्फ गर्म करने से ही प्राप्त कर लिया जाता है।

2. कॉपर (Cu₂S) से ताँबे का निष्कर्षण

ताँबा प्राकृतिक रूप से Copper glance (Cu₂S) के रूप में मिलता है।

जब इसे वायु में गर्म किया जाता है तो यह पहले Copper oxide (Cu₂O) में बदल जाता है।

फिर Cu₂O और Cu₂S आपस में अभिक्रिया करके शुद्ध ताँबा (Cu) देते हैं।

प्रतिक्रिया :
2Cu₂S + 3O₂ → 2Cu₂O + 2SO₂
2Cu₂O + Cu₂S → 6Cu + SO₂

👉 इस प्रकार ताँबा (Copper) भी केवल गर्म करने से प्राप्त हो जाता है।

सारांश:

💠 Hg (Mercury) – मुख्य अयस्क: HgS (सिनाबार) – प्रक्रिया: वायु में गर्म करना – अंतिम उत्पाद: Hg (पारा)

💠 Cu (Copper) – मुख्य अयस्क: Cu₂S (कॉपर ग्लांस) – प्रक्रिया: वायु में गर्म करना – अंतिम उत्पाद: Cu (ताँबा)

💡 Key Point याद रखने का आसान तरीका:

👉 नीचे वाली धातुएँ (Hg, Cu, Ag, Au) इतनी कम reactive होती हैं कि इन्हें heat करो और metal मिल जाएगा।

3.4.4 सक्रियता श्रेणी के मध्य में स्थित धातुओं का निष्कर्षण

सक्रियता श्रेणी के बीच की धातुएँ (जैसे– लोहा, जिंक, लेड, कॉपर) बहुत अधिक अभिक्रियाशील भी नहीं होतीं और न ही बहुत कम। इसलिए ये प्रकृति में प्रायः सल्फाइड (S²⁻ वाले यौगिक) या कार्बोनेट (CO₃²⁻ वाले यौगिक) के रूप में पाई जाती हैं।

(A) अयस्क से धातु निकालने के लिए पहला कदम – अयस्क को ऑक्साइड में बदलना

क्योंकि धातु को सीधे सल्फाइड या कार्बोनेट से निकालना कठिन होता है, इसलिए इन्हें पहले धातु ऑक्साइड में बदला जाता है।

भर्जन (Roasting): सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में अधिक ताप पर गर्म किया जाता है। इस प्रक्रिया में सल्फाइड ऑक्साइड में बदल जाता है।

उदाहरण: 2ZnS + 3O₂ → 2ZnO + 2SO₂ ↑

निस्तापन (Calcination): कार्बोनेट अयस्क को वायु की अनुपस्थिति या सीमित वायु में गर्म किया जाता है। इसमें कार्बोनेट विघटित होकर ऑक्साइड में बदल जाता है और CO₂ गैस निकल जाती है।

उदाहरण: ZnCO₃ → Δ ZnO + CO₂ ↑

(B) धातु ऑक्साइड का अपचयन (Reduction)

जब अयस्क को ऑक्साइड में बदल दिया जाता है, तब अगला कदम है ऑक्साइड को धातु में बदलना। इसके लिए अलग-अलग अपचायक का उपयोग किया जा सकता है।

कार्बन द्वारा अपचयन: धातु ऑक्साइड को कार्बन (कोयला/कोक) के साथ गर्म करने पर धातु प्राप्त होती है।

उदाहरण: ZnO + C → Δ Zn + CO ↑

अधिक अभिक्रियाशील धातुओं द्वारा विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction): कुछ धातुएँ (जैसे– Na, Ca, Al) इतनी अधिक अभिक्रियाशील होती हैं कि वे अन्य धातुओं को उनके यौगिकों से विस्थापित कर सकती हैं।

उदाहरण: 3MnO₂ + 4Al → 3Mn + 2Al₂O₃ + ऊष्मा

इसमें Al (एल्युमिनियम) ऑक्सीकरण होकर Al₂O₃ बनाता है और MnO₂ का अपचयन होकर Mn धातु बनती है।

(C) थर्मिट अभिक्रिया (Thermite Reaction)

यह एक विशेष प्रकार की विस्थापन अभिक्रिया है जिसमें Fe₂O₃ (आयरन ऑक्साइड) को Aluminium powder से गर्म किया जाता है। इसमें बहुत अधिक ऊष्मा निकलती है, जिससे प्राप्त लोहा गुलित (molten) अवस्था में मिलता है।

उदाहरण: Fe₂O₃ + 2Al → 2Fe(l) + Al₂O₃ + ऊष्मा

👉 इस अभिक्रिया का उपयोग रेल की पटरियों और मशीनों के भागों की दरारें जोड़ने में किया जाता है।

✅ संक्षेप में याद रखने योग्य बिंदु:

सक्रियता श्रेणी के मध्य की धातुएँ प्रायः सल्फाइड/कार्बोनेट अयस्क में मिलती हैं।

पहले इन्हें ऑक्साइड में बदला जाता है → (भर्जन/निस्तापन द्वारा)।

फिर ऑक्साइड का अपचयन → (कार्बन या अन्य सक्रिय धातुओं से)।

थर्मिट अभिक्रिया → लोहे की पटरियों को जोड़ने का विशेष उपयोग।

📘 3.4.5 सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर स्थित धातुओं का निष्कर्षण

🔹 परिचय

सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) के सबसे ऊपर की धातुएँ (जैसे— Na, K, Mg, Ca, Al) बहुत ही अत्यधिक अभिक्रियाशील होती हैं।

ये धातुएँ इतनी reactive होती हैं कि इन्हें कार्बन से reduce (अपचयित) करके उनके यौगिकों से नहीं निकाला जा सकता।

कारण: इन धातुओं की ऑक्सीजन के प्रति अधिक आकर्षण शक्ति होती है। यानि, ये धातुएँ ऑक्सीजन को कार्बन से भी ज्यादा मजबूती से पकड़े रहती हैं।

इसलिए इन्हें निकालने के लिए एक विशेष विधि: विद्युत अपघटन (Electrolysis) का प्रयोग किया जाता है।

🔹 सोडियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम का निष्कर्षण

इन धातुओं को उनके पिघले हुए क्लोराइड (molten chlorides) के विद्युत अपघटन से प्राप्त किया जाता है।

विद्युत अपघटन में दो इलेक्ट्रोड होते हैं:

  • कैथोड (–): यहाँ धातु आयन (Na⁺, Mg²⁺, Ca²⁺) इलेक्ट्रॉन पाकर धातु बनते हैं।
  • ऐनोड (+): यहाँ क्लोराइड आयन (Cl⁻) इलेक्ट्रॉन खोकर गैस (Cl₂) बनाते हैं।

⚡ रासायनिक अभिक्रियाएँ:

कैथोड पर: Na⁺ + e⁻ → Na (सोडियम आयन इलेक्ट्रॉन पाकर सोडियम धातु बनता है)

ऐनोड पर: 2Cl⁻ → Cl₂ + 2e⁻ (क्लोराइड आयन इलेक्ट्रॉन खोकर क्लोरीन गैस बनाता है)

👉 इसी प्रकार Mg और Ca को भी molten chloride के electrolysis से निकाला जाता है।

🔹 एल्युमिनियम का निष्कर्षण

एल्युमिनियम ऑक्साइड (Al₂O₃) का विद्युत अपघटन (electrolytic reduction) करके एल्युमिनियम धातु प्राप्त की जाती है।

इसमें भी वही प्रक्रिया होती है:

  • कैथोड पर Al³⁺ आयन इलेक्ट्रॉन पाकर Al धातु बनाते हैं।
  • ऐनोड पर O²⁻ आयन इलेक्ट्रॉन खोकर O₂ गैस बनाते हैं।

🔹 मुख्य बिंदु (Exam Special)

सबसे ऊपर की धातुएँ Electrolysis से ही निकाली जाती हैं। इन्हें कार्बन से reduce नहीं किया जा सकता।

Na, K, Ca, Mg, Al — सभी का extraction electrolysis method से होता है।

कैथोड पर धातु (metal) जमा होती है।

ऐनोड पर गैस (Cl₂, O₂) मुक्त होती है।

📌 Short Trick याद रखने के लिए: "सबसे ऊपर की धातुएँ करंट से ही मानेंगी" (मतलब— Electrolysis से ही निकलेंगी, heating या carbon reduction से नहीं)।

📘 3.4.6 धातुओं का परिष्करण (Refining of Metals)

🔹 परिचय

अपचयन (reduction) या अन्य प्रक्रियाओं से प्राप्त धातुएँ पूरी तरह शुद्ध नहीं होतीं।

इनमें अपद्रव्य (impurities) रहते हैं।

शुद्ध धातु प्राप्त करने के लिए इन्हें हटाना आवश्यक होता है।

सबसे प्रचलित और उपयोगी विधि है: विद्युत अपघटन (Electrolytic Refining)।

🔹 विद्युत अपघटन परिष्करण की प्रक्रिया

धातु का अशुद्ध रूप ऐनोड के रूप में रखा जाता है।

शुद्ध धातु की पट्टी कैथोड के रूप में रखी जाती है।

धातु का लवण विलयन (salt solution) इलेक्ट्रोलाइट के रूप में प्रयोग होता है।

जब विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है:

  • कैथोड पर शुद्ध धातु जमा होता है।
  • ऐनोड पर अशुद्ध धातु धीरे-धीरे घुल जाता है।
  • विलयन में कुछ अशुद्धियाँ भी घुल जाती हैं, जबकि अविलेय अशुद्धियाँ ऐनोड तल पर गिर जाती हैं जिसे ऐनोड पंक कहते हैं।

🔹 उदाहरण: कॉपर (तांबा) का परिष्करण

  • कैथोड: शुद्ध तांबे की पट्टी
  • ऐनोड: अशुद्ध तांबा
  • इलेक्ट्रोलाइट: अम्लीकृत कॉपर सल्फेट का विलयन

⚡ प्रक्रिया:

धारा प्रवाहित करने पर, शुद्ध तांबा कैथोड पर जमा होता है।

अशुद्ध तांबा ऐनोड से घुलकर विलयन में जाता है।

अविलेय अशुद्धियाँ ऐनोड तल पर गिरती हैं (ऐनोड पंक)।

🔹 परिष्करण में प्रयुक्त धातुएँ

कॉपर (Cu), जिंक (Zn), टिन (Sn), निकेल (Ni), सिल्वर (Ag), गोल्ड (Au)

🔹 मुख्य बिंदु (Exam Special)

  • Electrolytic refining से धातु पूरी तरह शुद्ध हो जाती है।
  • कैथोड: शुद्ध धातु जमा
  • ऐनोड: अशुद्ध धातु घुलती है
  • ऐनोड पंक: अविलेय अशुद्धियाँ
  • Electrolyte का प्रयोग धातु के लवण विलयन के रूप में होता है।

💡 Shortcut Tip: "कैथोड पर जमा, ऐनोड घुला, पंक नीचे पड़ा।"

(मतलब: शुद्ध धातु कैथोड पर, अशुद्ध धातु ऐनोड घुला, अविलेय अशुद्धियाँ पंक)

📘 3.5 संक्षारण (Corrosion)

🔹 परिचय

संक्षारण वह प्रक्रिया है जिसमें धातु वायुमंडल या किसी अन्य वातावरण में धीरे-धीरे खराब होकर अपने धात्विक स्वरूप को खो देती है।

इसे आम बोलचाल में जंग लगना या धातु का ओक्सीडाइज होना कहते हैं।

🔹 कुछ सामान्य उदाहरण

सिल्वर (चाँदी)

खाली वायुमंडल में कुछ ही दिनों में सिल्वर की वस्तुएँ काली हो जाती हैं।

कारण: वायुमंडल में उपस्थित सल्फर सिल्वर के साथ अभिक्रिया करके सिल्वर सल्फाइड (Ag₂S) बना देता है।

कॉपर (ताँबा)

वायुमंडल में मौजूद आर्द्र कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂ + H₂O) के संपर्क में आने पर सतह पर हरी परत बन जाती है, जिसे बेसिक कॉपर कार्बोनेट [Cu(OH)₂·CuCO₃] कहते हैं।

लोहे (Fe)

लंबे समय तक आर्द्र वायुमंडल में रहने पर लोहे पर लाल-भूरे रंग की परत चढ़ जाती है।

इसे हम जंग (Fe₂O₃·xH₂O) कहते हैं।

🔹 जंग लगने की अवस्थाएँ (Observations)

  • परखनली A: लोहे की कील वायु + जल दोनों के संपर्क में → जंग लग गई।
  • परखनली B: लोहे की कील केवल जल में → जंग नहीं लगी।
  • परखनली C: लोहे की कील केवल शुष्क वायु में → जंग नहीं लगी।

✅ निष्कर्ष:

लोहे पर जंग तभी लगती है जब वह जल और ऑक्सीजन दोनों के संपर्क में हो।

सिर्फ वायुमंडल या सिर्फ जल से अकेले जंग नहीं लगती।

🔹 मुख्य बिंदु (Exam Special)

  • Corrosion = धातु का धीरे-धीरे खराब होना।
  • लोहे पर जंग जल + ऑक्सीजन की उपस्थिति में लगती है।
  • सिल्वर और कॉपर भी विशेष परिस्थितियों में संक्षारित होते हैं।

💡 Shortcut Tip:

👉 "लोहे की जंग = पानी + हवा"

(मतलब: जंग सिर्फ तभी लगेगी जब दोनों एक साथ हों)

📘 3.5.1 संक्षारण से संरक्षण (Prevention of Corrosion)

🔹 लोहे और इस्पात को जंग से बचाने के तरीके:

  • पेंट करना → लोहे की सतह को ऑक्सीजन और जल से अलग करता है।
  • तेल/ग्रीस लगाना → सतह पर सुरक्षात्मक परत बनती है।
  • यशदलेपन (Galvanization) → लोहे की सतह पर जस्ते (Zn) की पतली परत चढ़ाना। जस्ते की परत नष्ट होने के बाद भी लोहे की वस्तु जंग से सुरक्षित रहती है। कारण: जस्ता लोहे की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील है, इसलिए यह लोहे को ऑक्सीजन और जल से पहले प्रतिक्रिया करने देता है।
  • क्रोमियम लेपन (Chromium Coating) → क्रोमियम की परत जंग लगने से रोकती है।
  • एनोडाइजिंग (Anodization) → विशेष रूप से एल्युमिनियम की सतह पर सुरक्षात्मक ऑक्साइड परत बनाना।
  • मिश्रधातु बनाना (Alloying) → लोहे के साथ अन्य धातुएँ मिलाकर जंग प्रतिरोधी मिश्रधात बनाना।

🔹 मिश्रधातु (Alloy)

मिश्रधातु = दो या दो से अधिक धातुओं का मिश्रण।

उद्देश्य: धातु के गुणधर्म सुधारना।

उदाहरण:

  • लोहे + कार्बन (0.05%) → कठोर और मजबूत लोहे (Steel)।
  • लोहे + निकल + क्रोमियम → स्टेनलेस स्टील (जंग नहीं लगता)।

🔹 विशेष मिश्रधातु (Amalgam / Alloy Examples)

पीतल (Brass) = ताँबा (Cu) + जस्ते (Zn) → सजावट, हार्डवेयर

ताम्र टिन (Bronze) = ताँबा (Cu) + टिन (Sn) → मूर्तियाँ, टॉम्बिंग

सीसा टिन (Solder) = सीसा (Pb) + टिन (Sn) → विद्युत तारों की वेल्डिंग

ध्यान: मिश्रधातु का विद्युत चालकता और गलनांक शुद्ध धातु से अलग होता है।

💡 Shortcut Tip:

जंग रोकने के लिए: “पेंट, तेल, ग्रीस, जस्ता, क्रोमियम, मिश्रधात”

मिश्रधातु = गुणधर्म सुधारना + जंग रोधक + ताकत बढ़ाना

✨ हमने इस Lesson से क्या सीखा?

1. तत्वों का वर्गीकरण
सभी तत्व दो भागों में बाँटे जाते हैं → धातु और अधातु
2. धातुओं के गुण
✔ तन्य → तार बनाए जा सकते हैं
✔ आघातवर्ध्य → चादर बनाई जा सकती है
✔ चमकीली, ऊष्मा और विद्युत की अच्छी चालक
✔ पारद (Hg) को छोड़कर सब ठोस
✔ हमेशा धनात्मक आयन (cation) बनाते हैं
3. धातुओं की अभिक्रियाएँ
✔ ऑक्सीजन से → क्षारकीय ऑक्साइड बनाते हैं
✔ उभयधर्मी ऑक्साइड → Al₂O₃, ZnO
✔ जल और अम्ल से अभिक्रियाशीलता अलग-अलग
सक्रियता श्रेणी के आधार पर धातुओं को क्रमबद्ध किया जाता है
✔ H से ऊपर वाली धातुएँ → अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित कर सकती हैं
✔ अधिक सक्रिय धातु → कम सक्रिय धातु को उसके लवण से विस्थापित कर सकती है
4. धातुओं की उपस्थिति और निष्कर्षण
✔ प्रकृति में स्वतंत्र अवस्था या यौगिक के रूप में पाई जाती हैं
✔ अयस्क से शुद्ध धातु निकालने की प्रक्रिया = धातुकर्म (Metallurgy)
5. मिश्रातु (Alloys)
✔ 2 या 2 से अधिक धातुएँ / धातु + अधातु मिलाने पर मिश्रातु
✔ उदाहरण: पीतल, काँसा, स्टील
6. धातुओं का संक्षारण (Corrosion)
✔ नमी और ऑक्सीजन के संपर्क में धातु की सतह खराब होना
✔ लोहे में इसे जंग लगना (Rusting) कहते हैं
7. अधातुओं के गुण
✔ धातुओं के उल्टे
✔ न तन्य, न आघातवर्ध्य
✔ ऊष्मा व विद्युत के खराब चालक
✔ अपवाद: ग्रेफाइट → अच्छा चालक
👉 पूरा लेसन हमें ये सिखाता है:

✔ धातु और अधातु में अंतर
✔ उनके गुणधर्म और अभिक्रियाएँ
✔ धातुओं का निष्कर्षण, उपयोग और संक्षारण
✔ मिश्रातु का महत्व